Ashok Thakur

Friday, 18 December 2015

गीता का सन्देश

गीता ने कहा है कि सतयुग में यदि मर्यादा पुरषोतम भगवान् राम सार्थक थे तो महाभारत काल में भगवान् कृष्ण ही सार्थक થે अन्यथा वे ही फिर से अवतरित होते न कि कृष्ण और भगवान् कृष्ण ने गीता के माध्यम से समझाया कि समय व कालके अनुसार धर्म के मापदंड भी बदल जाते हैं | जहाँ तक वर्तमान का प्रश्न है तो कलयुग के इन भ्रस्टाचारियों को मिटाने के लिए बाबा रामदेव जैसा धार्मिक, सामाजिक व आर्थिक रूप से सक्षम संत ही चाहिए है अन्यथा संत निगमानंद जैसे स्वर्ग सिधार जाते और कोई पूछता भी नहीं | आज करोड़ों लोगों के समर्थन के बावजूद रामलीला मैदान में जो तांडव हुआ उससे बाबा रामदेव तो अपने सामाजिक व आर्थिक आधार के बल पर बच गए और एक बार फिरखड़े होकर लड़ने के लिए तयार हैं अन्यथा कोई और होता तो सदा के लिए समाप्त हो जाता | गीता ने साफ़ कहा है अधर्म का नाश करने के लिए यदि मार्ग से थोड़ा इधर उधर जाना हो तो जाओ मगर लक्ष्य साफ़ व पाक होना चाहिए |

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